Wednesday, July 15, 2020

संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष की कहानी



  • संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी- 


 संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी हिंदुस्तान में विवादित संत माने जाने वाले इकलौते ऐसे महापुरुष हैं जिनके बारे में अब तक सही जानकारी किसी भी व्यक्ति के पास नहीं है, यहाँ तक की हर व्यक्ति, वस्तु व स्थान की जानकारी रखने वाली वेबसाइट विकिपीडिया को भी नहीं। इस ब्लॉग में हम आपको संत रामपाल जी के बारे में पूरी जानकारी तथ्यों के साथ देंगें।
संत रामपाल जी महाराज हिंदुस्तान में अपने ज्ञान और आदर्शों के लिए खासे चर्चित रहे हैं,
फिलहाल केंद्रीय जेल हिसार में बंद संत रामपाल जी कबीर पंथ के एक मात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने कबीर जी को भगवान प्रमाणित किया और इसके लिए उन्होंने हर धर्म के शास्त्रों का गहन अध्ययन करके लोगों को बड़े पर्दे पर दिखाया, संत रामपाल के अनुयायी उन्हें भगवान के बराबर मानते हैं और उनमे अटूट आस्था रखते हैं. जेल में जाने के लगभग ५ साल बाद
 संघर्ष की कहानी
 संघर्ष की कहानी

भी लाखों की तादाद में लोग हिसार जेल के बाहर मथा टेकने जाते हैं…
आखिर क्यों हुआ विवाद?
साल २००६ में करोंथा जिला रोहतक स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग कर रहे संत रामपाल और उनके अनुयायिओ को आर्य प्रतिनिधि सभा के नेतृत्व में कुछ आपराधिक लोगों ने घेर लिया,
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी

उस समय सतलोक आश्रम करोंथा में लगभग ५ से ६ हजार अनुयायी मौजूद थे, हजारों की तादाद में उप्रदवी लोगों हथियारों से लैस होकर आश्रम को बाहर से घेर रखा था,
देखिये तत्कालीन SDM रोहतक की ये रिपोर्ट जिसमें उनहोने साफ़ कर किया कि सतलोक आश्रम पर हमला करने की नियत से कितने लोग वहां इकठा हुए। .


इसके पीछे का कारण था कि आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा में गुरुकुल, गौशाला और सत्यार्थ प्रकाश नाम के ग्रंथ को अपना आधार मानती है…. आर्य प्रतिनिधि सभा दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने वाली संस्था के तौर पर भी जानी जाती है, लेकिन विवाद की मुख्य जड़ सत्यार्थ प्रकाश में लिखी त्रुटियां थी, जो आज भी सत्यार्थ प्रकाश में विधमान है, संत रामपाल जी महाराज ने जब जाना कि कबीर ही भगवान हैं तो उन्होंने लोगों को समझाने के लिए वेदों का अध्ययन करना शुरू किया, संत रामपाल जी महाराज चाहते थे कि लोगों को प्रमाण देकर समझाने से श्रद्धालुओं का विश्वास कबीर जी में दृढ़ होगा, चूंकि हरियाणा में हिंदू संत महात्माओं ने अपनेअधूरे ज्ञान के चलते कबीर जी को केवल एक कवि और भक्त तक ही बताया हुआ था इसलिए भी वेदों से प्रमाणित करना अनिवार्य था, वेदों का अध्य्यन करते करते संत रामपाल जी ने सोचा क्यों न वेदों का सार माने जाने वाले सत्यार्थ प्रकाश को पढा जाए, क्योंकि वेदों का अनुवाद और सत्यार्थ प्रकाश की रचना दयानंद सरस्वती ने ही की थी, इसलिए सत्यार्थ प्रकाश को वेदों का सार मानते हुए जब संत रामपाल जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ा तो उनको बड़ी हैरानी हुई कि वेदों में और सत्यार्थ प्रकाश में जमीन आसमान का अंतर हैं, क्योंकि वेद जो कह रहे थे, सत्यार्थ प्रकाश में ठीक उसके विपरीत लिखा था, सत्यार्थ प्रकाश वेदों के विपरीत होने के साथ साथ सामाजिक ताने बाने को तहस नहस कर सकता था, क्योंकि सत्यार्थ प्रकाश के चौथे समुल्लास में इतनी बेहूदा बातें लिखी हैं
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक की सच्चाई
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक की सच्चाई

जिनको आम सभ्य नागरिक के सामने बता पाना भी मुश्किल है,   अलावा महापुरुषों पर अभद्र और जातिगत टिप्पणी करना, सूर्य पर जीवन बताना जैसी बहुत सी अनर्गल बातों को पढा तो संत रामपाल जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश में लिखी इन बेहूदी बातों पर आपत्ति जताई, और आर्यप्रतिनिधि सभा को निवेदन किया कि सत्यार्थ प्रकाश में जो लिखा है वो वेदों के विरुद्ध है, इसमें समाज में अराजकता और अंधविश्वास फैल रहा है, कृपया इस पुस्तक में जो त्रुटियां है उन्हें ठीक करें। इस पर आर्यप्रतिनिधि सभा ने नाराज होते हुए अखबार के माध्यम से संत रामपाल जी पर निराधार आरोप लगाते हुए त्रुटियों को सही करने से मना कर दिया, और सत्यार्थ प्रकाश को सही बताते हुए उसे आर्य समाज की रीढ़ की हड्डी घोषित किया। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज ने भी समाचार पत्र के माध्यम से लोगों को सत्यार्थ प्रकाश में लिखी त्रुटियों को बताना शुरू कर दिया, ऐसा करना आर्यप्रतिनिधि सभा को रास नही आया, संत रामपाल जी महाराज और उनके आश्रम को खत्म करने की नियत से कानून का सरेआम मजाक बनाते हुए हजारों की तादाद में शरारती तत्वों के साथ मिलकर आर्य प्रतिनिधि सभा ने सतलोक आश्रम करोंथा पर हमला बोल दिया।  ..जिसमें गुरुकुल में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे, उनके माता पिता तक को नहीं पता था की गुरु कुल में शिक्षा प्राप्ति के लिए भेजे गए उनके बच्चे किसी के आश्रम पर हमला करने गए हैं…आश्रम पर हमला करने आयी भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले , पानी की बौछारे और फिर हवाई फायर भी किए , लेकिन हिंसक भीड़ को आर्य प्रतिनिधि सभा ने इस कदर भड़काया हुआ था कि भीड़ पुलिस के ऊपर पथराव करने लगी.पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही की .इस दौरान एक सोनू नाम के लड़के की मौत हो गयी , सोनू जोकि झज्जर के बागपत गांव का रहने वाला था…

  • इस पुरे विवाद में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भूमिका

बड़ी हैरानी की बात है कि जिस लड़के की मौत पुलिस के साथ हिसंक झड़प में हुई उसकी मौत का जिम्मेदार संत रामपाल को बनाया गया और ये मामला कहीं न कहीं हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा की सह पर ही संत रामपाल पर बनाया गया…क्योंकि सर्वविदित है की मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा अपने आपको पिछली ३ पीढ़ी से आर्य समाजी मानते हैं.
 एक षड्यंत्र के तहत भेजा गया संत रामपाल जी महाराज को जेल
  षड्यंत्र 
...अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने एक संत के खिलाफ इस तरह का बर्ताव किया। ये दावा इस लिए भी मजबूत है क्योंकि जिस भीड़ ने सतलोक आश्रम करोंथा के ऊपर हमला किया उन सभी को हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा ने ५०-५० हजार का इनाम दिया। मतलब हिंसा करने वालो को तथा पुलिस पर पथराव करने वालो को इनाम दिया गया… इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला आप किसी के घर पर हमला करने के लिए जाये वहां गोलिया चलाएं। पुलिस पर पथराव करें। यदि आपको चोट लगती है तो ५० हजार और मौत होती है ५ लाख का इनाम हरियाणा सरकार से पाएं।
इस तरह की बेहूदगी हरियाणा में एक संत के साथ सरकार ने की और एक निर्दोष संत को और उनके ३८ भक्तों को २१ महीने तक जेल में रखा गया
 जेल में जाने की सच्चाई
 संत रामपाल जी महाराज की जीवन के संघर्ष की कहानी


.कोर्ट में आने वाले उनके अनुयायिओं को पीटा गया..कोर्ट .२१ महीने बाद जब संत रामपाल जी महाराज की जमानत होती है उसके बाद फिर से वैसा ही घिनोना कार्य हरियाणा सरकार ने किया।

 संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष के पीछे का सच
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष के पीछे का सच

संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष का दौर अभी थमा नही था ये तो शुरुआत भर थी,क्योंकि संत रामपाल जी महाराज ने जो आवाज सत्यार्थ प्रकाश में लिखी अज्ञानता के खिलाफ उठाई थी उस आवाज को दबाने के लिए हर वो ताकत संत रामपाल जी के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई जो झूठ की बुनियाद पर अपना धंधा चलाने में लगे थे, उसमें चाहे खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री हो, या तत्कालीन समाचार पत्र या न्यूज़ चैनल सभी ने मिलकर झूठ का ऐसा ताना बाना बुना की लोग संत रामपाल जी को घृणा की
दृष्टि से देखने लगे। क्योंकि तत्कालीन समाचार पत्रों की हैडलाइन देखकर कोई भी व्यक्ति सच को जानने की हिम्मत ही नही कर पाया और जो मीडिया ने दिखाया वो ही सच लगने लगा। अखबार के मुख्य पेज पर सूत्रों के हवाले से ऐसी ऐसी खबरें छापी गयी जिसका कोई आधार नही था, झूठ जब हद से ज्यादा छपने लगा तो SP रोहतक ने मीडिया को इस पर रोक लगाने के लिए कहा तो 15 दिन तक मीडिया जब पूरी तरह लोगों में संत रामपाल की छवि को बदनाम कर चुका था तब अखबार के बीच एक कोने में खबर छपी की SP रोहतक के अनुसार सतलोक आश्रम में कोई भी अवैध वस्तु नही मिली। लेकिन ये अपने आप में एक मजाक था उन लोगों के साथ जो मीडिया की खबरों को पढ़कर ये मान चुके थे कि संत रामपाल अपराधी हैं। लगातार 21 महीने संत रामपाल जी जेल में सलाखों के पीछे संघर्ष करते रहे और उनके अनुयायी रोहतक कोर्ट के बाहर सड़कों पर आर्य समाज के कुछ गुंडो की गुंडई के खिलाफ संघर्ष करते रहे। सरकार को किसी भी तरह से संत के खिलाफ कोई सबूत नही मिला, यहां तक कि FSL रिपोर्ट में भी ये साफ हो गया कि संत रामपाल का सोनू की हत्या में कोई हाथ नही है, न संत रामपाल जी को सोनू की हत्या में सीधा दोषी ठहराया जा सकता है, यहां तक कि आश्रम में एक भी गैर लाइसेंसी हथियार नही मिला, बावजूद इसके संत रामपाल को 21 महीने जेल में रखा गया, आप खुद अंदाजा लगाएं की देश और समाज हित के लिए आवाज उठा कर संत ने क्या गुनाह किया था? लेकिन अपने गंदी राजनीति को चमकाने के लिए संत पर अत्याचार किये गए। उसके बाद 21 महीने जेल में रहने के बाद हाइकोर्ट से संत रामपाल जी महाराज को जमानत मिली। संत रामपाल जी महाराज के मानने वालों की संख्या पहले से ज्यादा हो चुकी थी, लोग भी समझने लगे थे कि मीडिया ने उन्हें गुमराह किया है

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