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Tuesday, June 23, 2020

आत्महत्या करना परमात्मा के विधान में सही है या गलत


  • आइए जानते हैं आत्महत्या करना सही है या फिर गलत


मृत्यु के बादः क्या कहता है गरुड़ पुराण

parmatma ka vidhan
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हिंदू धर्म के 18 पुराणों में एक है गरुड़ पुराण। इस पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को जीवन मृत्यु का रहस्य बताया है। इस पुराण में मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार मिलने वाले दंडों के बारे में भी बताया गया है। यह पुराण कहता है कि अपने कर्मों का परिणाम हर हाल में भोगना पड़ता है। जीवन से भगाने का प्रयास करने पर भी इनसे बच नहीं सकते बल्कि आत्मघात के परिणाम और कष्टकारी होते हैं। आत्मघात किसी भी तरह से मोक्ष नहीं दिला सकता है। विष्णु पुराण में श्रीकृष्ण ने मोक्ष प्राप्ति के लिए साधना करने का ज्ञान दिया है ना कि आत्मघात का।



  • आत्महत्या के बाद का कष्ट


parmatma ka vidhan
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वैदिक ग्रंथों में आत्महत्या करनेवाले व्यक्ति के लिए एक श्लोक लिखा गया है, जो इस प्रकार है…
असूर्या नाम ते लोका अंधेन तमसावृता।
तास्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जना:।।
इसका अर्थ है कि ”आत्महत्या हत्या करनेवाला मनुष्य अज्ञान और अंधकार से भरे, सूर्य के प्रकाश से हीन, असूर्य नामक लोक को जाते हैं।”

  • आत्महत्या से भी पीछा नहीं छोड़ती समस्याएं

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धर्मग्रंथों के अनुसार जिन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति आत्महत्या करता है, उनका हल उसे जिंदा रहने पर तो मिल सकता है लेकिन आत्महत्या करके अंतहीन कष्टों वाले जीवन की शुरुआत हो जाती है। इन्हें बार-बार ईश्वर के बनाए नियम को तोड़ने का दंड भोगना पड़ता है।



  • इस तरह तड़पती रहती है आत्मा


parmatma ka vidhan
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धार्मिक मान्यताएं हैं कि जो व्यक्ति आत्महत्या करता है, उसकी आत्मा न तो स्वर्ग जा सकती है, न नरक और न ही वह वापस अपने खोए हुए जीवन में आ सकती है। ऐसे में वह आत्मा अधर में लटक जाती है और अंधकार में भटकते हुए छटपटाहट भरा जीवन जीती है, तब तक जब तक कि उसकी असल उम्र पूरी नहीं हो जाती।


  • दर-दर भटकने को मजबूर


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हिंदू धर्म में मान्यता है कि आत्‍महत्‍या करने के बाद जो जीवन होता है वह इस जीवन से ज्‍यादा कष्‍टकारी होता है। आत्मा अधूरेपन की भावना के साथ दर-दर भटकती है। क्योंकि आत्महत्या से उसका जीवन चक्र अधूरा रह जाता है। व्यक्ति की आत्मा को जब नया शरीर मिलता है तब फिर से उन कर्मों को भोगना पड़ता जिससे भागकर उसने आत्मघात किया होता है। यानी कर्मों से भागकर कहीं नहीं जा सकते हैं। जो भी कर्मफल है उसको तो भोगना ही पड़ता है। आत्मघात से कर्मों से मुक्ति नहीं मिलती है बल्कि और भी कष्ट भोगना पड़ता है।


  • पूर्ण परमात्मा के विधान के अनुसार आत्महत्या करना घोर अपराध है 
    parmatma ka vidhan
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संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संग में बताते हैं की आत्महत्या करने से जीव को कभी मोक्ष नहीं मिल सकता मोक्ष के लिए सच्चे संत से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए भक्ति करो जब सही टाइम आएगा तो परमात्मा खुद सतलोक लेकर जाएंगे जो इंसान आत्महत्या करता वह कुत्ते और गधे की योनि में जाता है इसलिए ऐसा कोई कदम न उठाए परमात्मा की सत भक्ति से सभी दुख दूर हो जाते हैं आत्महत्या और हत्या यह दोनों परमात्मा के विधान के अनुसार घोर अपराध है
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