Friday, August 14, 2020

IndependenceDay

FreedomFrom_DowrySystem
On this #IndependenceDay must know this spiritual fact, with proof according our holy books.
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Wednesday, August 5, 2020

अवश्य जानिए धनतेरस और दीपावली मनाने से हमें कितना लाभ है

धनतेरस से लाभ=

धनतेरस मनाने से कुछ लाभ नहीं क्योंकि धनतेरस मनाने से हमें कितना लाभ है वेदों और गीताजी में इसके बारे में कहीं पर भी नहीं लिखा कि धनतेरस से लाभ मिलता है धनतेरस मनाना शास्त्रों में कहीं पर भी प्रमाण नहीं है इस को मनाने का धनतेरस से धन नहीं मिल सकता धन तो पूर्ण परमात्मा की भक्ति शास्त्र अनुकूल करने से मिलता है


 धनतेरस से हानि=

धनतेरस मनाने से भी हानि गीताजी के अध्याय 23 के श्लोक 16 में लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्र अनुकूल भक्ति ना करके शास्त्रों के विरुद्ध भक्ति करेगा उसको ना तो मोक्ष प्राप्त होगा ना ही किसी प्रकार का धन प्राप्त होगा ना ही सुख मिलेगा और ना ही कोई मोक्ष प्राप्त होगा 

जैसे- जिस तरह विद्यार्थी अध्यापक प्रिंसिपल कि वह स्कूल की पूजा करने से परीक्षा में पास नहीं होगा ऐसे ही कुबेर की पूजा करने से मनुष्य को धन नहीं मिलता

अवश्य जाने धनतेरस से लाभ है या नहीं=
धनतेरस का त्यौहार मनाने से आर्थिक लाभ होता तो प्रत्येक मानव धनवान होता हमें धनतेरस का त्यौहार मनाने से धन लाभ नहीं होता क्योंकि यह शास्त्र विरुद्ध साधना है

धनतेरस पर चाहे कितना भी सोना खरीद लो लेकिन रावण जितना सोना 7 जन्म भी एकत्रित नहीं हो सकता एक मनुष्य को कितने धन की आवश्यकता होती है वह सत्संग से पता चलता है अवश्य देखें साधना टीवी 7:30 से 8:30 शाम

Friday, July 31, 2020

रब_की_रूह_न_मार

#रब_की_रूह_न_मार
जीव हत्या अल्लाह का आदेश नहीं
बकरीद के नाम पर निर्दोष जीवों की बलि देने वाले को यदि कलमा पढ़कर बकरे की गर्दन काटने से जन्नत मिलती तो कलमा पढ़कर अपने परिवार को जन्नत क्यों नहीं भेजते।
"अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram Youtube चैनल पर visit करें"

रब_की_रूह_न_मार

जीव हत्या अल्लाह का आदेश नहीं
बकरीद के नाम पर निर्दोष जीवों की बलि देने वाले को यदि कलमा पढ़कर बकरे की गर्दन काटने से जन्नत मिलती तो कलमा पढ़कर अपने परिवार को जन्नत क्यों नहीं भेजते।
"अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram Youtube चैनल पर visit करें"

Wednesday, July 15, 2020

संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष की कहानी



  • संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी- 


 संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी हिंदुस्तान में विवादित संत माने जाने वाले इकलौते ऐसे महापुरुष हैं जिनके बारे में अब तक सही जानकारी किसी भी व्यक्ति के पास नहीं है, यहाँ तक की हर व्यक्ति, वस्तु व स्थान की जानकारी रखने वाली वेबसाइट विकिपीडिया को भी नहीं। इस ब्लॉग में हम आपको संत रामपाल जी के बारे में पूरी जानकारी तथ्यों के साथ देंगें।
संत रामपाल जी महाराज हिंदुस्तान में अपने ज्ञान और आदर्शों के लिए खासे चर्चित रहे हैं,
फिलहाल केंद्रीय जेल हिसार में बंद संत रामपाल जी कबीर पंथ के एक मात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने कबीर जी को भगवान प्रमाणित किया और इसके लिए उन्होंने हर धर्म के शास्त्रों का गहन अध्ययन करके लोगों को बड़े पर्दे पर दिखाया, संत रामपाल के अनुयायी उन्हें भगवान के बराबर मानते हैं और उनमे अटूट आस्था रखते हैं. जेल में जाने के लगभग ५ साल बाद
 संघर्ष की कहानी
 संघर्ष की कहानी

भी लाखों की तादाद में लोग हिसार जेल के बाहर मथा टेकने जाते हैं…
आखिर क्यों हुआ विवाद?
साल २००६ में करोंथा जिला रोहतक स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग कर रहे संत रामपाल और उनके अनुयायिओ को आर्य प्रतिनिधि सभा के नेतृत्व में कुछ आपराधिक लोगों ने घेर लिया,
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष की कहानी

उस समय सतलोक आश्रम करोंथा में लगभग ५ से ६ हजार अनुयायी मौजूद थे, हजारों की तादाद में उप्रदवी लोगों हथियारों से लैस होकर आश्रम को बाहर से घेर रखा था,
देखिये तत्कालीन SDM रोहतक की ये रिपोर्ट जिसमें उनहोने साफ़ कर किया कि सतलोक आश्रम पर हमला करने की नियत से कितने लोग वहां इकठा हुए। .


इसके पीछे का कारण था कि आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा में गुरुकुल, गौशाला और सत्यार्थ प्रकाश नाम के ग्रंथ को अपना आधार मानती है…. आर्य प्रतिनिधि सभा दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने वाली संस्था के तौर पर भी जानी जाती है, लेकिन विवाद की मुख्य जड़ सत्यार्थ प्रकाश में लिखी त्रुटियां थी, जो आज भी सत्यार्थ प्रकाश में विधमान है, संत रामपाल जी महाराज ने जब जाना कि कबीर ही भगवान हैं तो उन्होंने लोगों को समझाने के लिए वेदों का अध्ययन करना शुरू किया, संत रामपाल जी महाराज चाहते थे कि लोगों को प्रमाण देकर समझाने से श्रद्धालुओं का विश्वास कबीर जी में दृढ़ होगा, चूंकि हरियाणा में हिंदू संत महात्माओं ने अपनेअधूरे ज्ञान के चलते कबीर जी को केवल एक कवि और भक्त तक ही बताया हुआ था इसलिए भी वेदों से प्रमाणित करना अनिवार्य था, वेदों का अध्य्यन करते करते संत रामपाल जी ने सोचा क्यों न वेदों का सार माने जाने वाले सत्यार्थ प्रकाश को पढा जाए, क्योंकि वेदों का अनुवाद और सत्यार्थ प्रकाश की रचना दयानंद सरस्वती ने ही की थी, इसलिए सत्यार्थ प्रकाश को वेदों का सार मानते हुए जब संत रामपाल जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ा तो उनको बड़ी हैरानी हुई कि वेदों में और सत्यार्थ प्रकाश में जमीन आसमान का अंतर हैं, क्योंकि वेद जो कह रहे थे, सत्यार्थ प्रकाश में ठीक उसके विपरीत लिखा था, सत्यार्थ प्रकाश वेदों के विपरीत होने के साथ साथ सामाजिक ताने बाने को तहस नहस कर सकता था, क्योंकि सत्यार्थ प्रकाश के चौथे समुल्लास में इतनी बेहूदा बातें लिखी हैं
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक की सच्चाई
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक की सच्चाई

जिनको आम सभ्य नागरिक के सामने बता पाना भी मुश्किल है,   अलावा महापुरुषों पर अभद्र और जातिगत टिप्पणी करना, सूर्य पर जीवन बताना जैसी बहुत सी अनर्गल बातों को पढा तो संत रामपाल जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश में लिखी इन बेहूदी बातों पर आपत्ति जताई, और आर्यप्रतिनिधि सभा को निवेदन किया कि सत्यार्थ प्रकाश में जो लिखा है वो वेदों के विरुद्ध है, इसमें समाज में अराजकता और अंधविश्वास फैल रहा है, कृपया इस पुस्तक में जो त्रुटियां है उन्हें ठीक करें। इस पर आर्यप्रतिनिधि सभा ने नाराज होते हुए अखबार के माध्यम से संत रामपाल जी पर निराधार आरोप लगाते हुए त्रुटियों को सही करने से मना कर दिया, और सत्यार्थ प्रकाश को सही बताते हुए उसे आर्य समाज की रीढ़ की हड्डी घोषित किया। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज ने भी समाचार पत्र के माध्यम से लोगों को सत्यार्थ प्रकाश में लिखी त्रुटियों को बताना शुरू कर दिया, ऐसा करना आर्यप्रतिनिधि सभा को रास नही आया, संत रामपाल जी महाराज और उनके आश्रम को खत्म करने की नियत से कानून का सरेआम मजाक बनाते हुए हजारों की तादाद में शरारती तत्वों के साथ मिलकर आर्य प्रतिनिधि सभा ने सतलोक आश्रम करोंथा पर हमला बोल दिया।  ..जिसमें गुरुकुल में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे, उनके माता पिता तक को नहीं पता था की गुरु कुल में शिक्षा प्राप्ति के लिए भेजे गए उनके बच्चे किसी के आश्रम पर हमला करने गए हैं…आश्रम पर हमला करने आयी भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले , पानी की बौछारे और फिर हवाई फायर भी किए , लेकिन हिंसक भीड़ को आर्य प्रतिनिधि सभा ने इस कदर भड़काया हुआ था कि भीड़ पुलिस के ऊपर पथराव करने लगी.पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही की .इस दौरान एक सोनू नाम के लड़के की मौत हो गयी , सोनू जोकि झज्जर के बागपत गांव का रहने वाला था…

  • इस पुरे विवाद में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भूमिका

बड़ी हैरानी की बात है कि जिस लड़के की मौत पुलिस के साथ हिसंक झड़प में हुई उसकी मौत का जिम्मेदार संत रामपाल को बनाया गया और ये मामला कहीं न कहीं हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा की सह पर ही संत रामपाल पर बनाया गया…क्योंकि सर्वविदित है की मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा अपने आपको पिछली ३ पीढ़ी से आर्य समाजी मानते हैं.
 एक षड्यंत्र के तहत भेजा गया संत रामपाल जी महाराज को जेल
  षड्यंत्र 
...अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने एक संत के खिलाफ इस तरह का बर्ताव किया। ये दावा इस लिए भी मजबूत है क्योंकि जिस भीड़ ने सतलोक आश्रम करोंथा के ऊपर हमला किया उन सभी को हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा ने ५०-५० हजार का इनाम दिया। मतलब हिंसा करने वालो को तथा पुलिस पर पथराव करने वालो को इनाम दिया गया… इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला आप किसी के घर पर हमला करने के लिए जाये वहां गोलिया चलाएं। पुलिस पर पथराव करें। यदि आपको चोट लगती है तो ५० हजार और मौत होती है ५ लाख का इनाम हरियाणा सरकार से पाएं।
इस तरह की बेहूदगी हरियाणा में एक संत के साथ सरकार ने की और एक निर्दोष संत को और उनके ३८ भक्तों को २१ महीने तक जेल में रखा गया
 जेल में जाने की सच्चाई
 संत रामपाल जी महाराज की जीवन के संघर्ष की कहानी


.कोर्ट में आने वाले उनके अनुयायिओं को पीटा गया..कोर्ट .२१ महीने बाद जब संत रामपाल जी महाराज की जमानत होती है उसके बाद फिर से वैसा ही घिनोना कार्य हरियाणा सरकार ने किया।

 संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष के पीछे का सच
संत रामपाल जी महाराज के संघर्ष के पीछे का सच

संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष का दौर अभी थमा नही था ये तो शुरुआत भर थी,क्योंकि संत रामपाल जी महाराज ने जो आवाज सत्यार्थ प्रकाश में लिखी अज्ञानता के खिलाफ उठाई थी उस आवाज को दबाने के लिए हर वो ताकत संत रामपाल जी के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई जो झूठ की बुनियाद पर अपना धंधा चलाने में लगे थे, उसमें चाहे खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री हो, या तत्कालीन समाचार पत्र या न्यूज़ चैनल सभी ने मिलकर झूठ का ऐसा ताना बाना बुना की लोग संत रामपाल जी को घृणा की
दृष्टि से देखने लगे। क्योंकि तत्कालीन समाचार पत्रों की हैडलाइन देखकर कोई भी व्यक्ति सच को जानने की हिम्मत ही नही कर पाया और जो मीडिया ने दिखाया वो ही सच लगने लगा। अखबार के मुख्य पेज पर सूत्रों के हवाले से ऐसी ऐसी खबरें छापी गयी जिसका कोई आधार नही था, झूठ जब हद से ज्यादा छपने लगा तो SP रोहतक ने मीडिया को इस पर रोक लगाने के लिए कहा तो 15 दिन तक मीडिया जब पूरी तरह लोगों में संत रामपाल की छवि को बदनाम कर चुका था तब अखबार के बीच एक कोने में खबर छपी की SP रोहतक के अनुसार सतलोक आश्रम में कोई भी अवैध वस्तु नही मिली। लेकिन ये अपने आप में एक मजाक था उन लोगों के साथ जो मीडिया की खबरों को पढ़कर ये मान चुके थे कि संत रामपाल अपराधी हैं। लगातार 21 महीने संत रामपाल जी जेल में सलाखों के पीछे संघर्ष करते रहे और उनके अनुयायी रोहतक कोर्ट के बाहर सड़कों पर आर्य समाज के कुछ गुंडो की गुंडई के खिलाफ संघर्ष करते रहे। सरकार को किसी भी तरह से संत के खिलाफ कोई सबूत नही मिला, यहां तक कि FSL रिपोर्ट में भी ये साफ हो गया कि संत रामपाल का सोनू की हत्या में कोई हाथ नही है, न संत रामपाल जी को सोनू की हत्या में सीधा दोषी ठहराया जा सकता है, यहां तक कि आश्रम में एक भी गैर लाइसेंसी हथियार नही मिला, बावजूद इसके संत रामपाल को 21 महीने जेल में रखा गया, आप खुद अंदाजा लगाएं की देश और समाज हित के लिए आवाज उठा कर संत ने क्या गुनाह किया था? लेकिन अपने गंदी राजनीति को चमकाने के लिए संत पर अत्याचार किये गए। उसके बाद 21 महीने जेल में रहने के बाद हाइकोर्ट से संत रामपाल जी महाराज को जमानत मिली। संत रामपाल जी महाराज के मानने वालों की संख्या पहले से ज्यादा हो चुकी थी, लोग भी समझने लगे थे कि मीडिया ने उन्हें गुमराह किया है

Tuesday, July 7, 2020

नवरात्रि पूजा ( navaratri pooja)पर्व विशेष
1. नवरात्रि (happy navratri) किस तरह मनानी चाहिए?
2. संसार में सब दुर्गा जी को माता कहकर क्यों संबोधित करते हैं?
3. दुर्गा जी इतना श्रृंगार करती हैं, कौन हैं उनके पति ?
4. नवरात्रि (navratri 2018 date)का त्यौहार मनाने की सही विधि कौन सी है, आइए जानते हैं।
5. क्या आप जानते हैं? हमारे हिंदू धर्म के शास्त्रों में कहीं पर भी नवरात्रि मनाने के बारे में नहीं बताया गया है?
6. क्या दुर्गा जी हमारे सभी दुखों का निवारण कर सकती हैं?
7. दुर्गा जी ने स्वयं किसी और प्रभु की भक्ति करने के लिए कहा है।
न जाने कितने सालों से हम सभी *दुर्गा पूजा कर रहे हैं। क्या कभी सोचा है, क्या लाभ और क्या हानि है?

1.नवरात्रि (navarathri festival 2018)किस तरह मनानी चाहिए?
जैसा की सभी हर साल “नवरात्रि” मनाते हैं तथा navaratri 2018 मना रहे और नौ दिनों तक व्रत करते हैं। अलग-अलग तरह माताजी की मूर्तियां रखते हैं उनकी पूजा, व्रत- उपासना (Navratri Vrat ) करते हैं, रंगबिरंगे कपड़े पहनते हैं और गरबा खेलते हैं। नव दुर्गा के रूप में नौ दिन मनाते हैं। लेकिन आखिर में कुछ पाखंडी अपना पाखंड दिखाते हैं और बेज़ुबान जानवरों की बलि मांगते हैं और भोले श्रद्धालु दे भी देते हैं। ताकि माता जी खुश हो जाएं और उनका परिवार खुशहाल रहे। पर क्या कभी ये सोचा है किसी की बलि देने से हमें वास्तव में खुशी मिल सकती है? अगर बलि देने से भगवान खुश होते तो अपनी सन्तान की बलि देकर देखो।

2. संसार में सब दुर्गा जी को माता कहकर क्यों संबोधित करते हैं?
दुर्गा को त्रिदेवजननी भी कहते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश की माता हैं दुर्गा जी।

3. दुर्गा जी इतना श्रृंगार करती हैं क्या उनके भी पति हैं?
जो स्त्री सुहागन होती है वही श्रंगार करती है। इसका मतलब माता दुर्गा भी सुहागन है। उनका पति है जिसका नाम ज्योति निरंजन (काल) है।

4. नवरात्रि (navratri news in hindi)का त्यौहार मनाने की सही विधि कौन सी है?
आइए जानते हैं।
किसी भी त्यौहार को मनाने से पहले गहराई तक जान लेना जरूरी होता है। क्योंकि हम एक नवरात्री (navratri kab hai)का त्यौहार ही नहीं बल्कि हम यह दर्शाते हैं की हमारे देवी देवता ऐसे दिखते थे या उन्होंने ऐसे काम किये। सही जानकारी लेने के लिए शास्त्रों की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। दुर्गा जी से लाभ पाने का वास्तविक मंत्र साधना तो केवल तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज जी ही बता सकते हैं शास्त्रों से प्रमाणित करके।

5. क्या आप जानते हैं? हमारे हिंदू धर्म के शास्त्रों में कहीं पर भी नवरात्रि त्यौहार मनाने के बारे में नहीं बताया गया है?
किसी के धर्म के बारे में पूर्ण जानकारी के लिए सबसे पहले हमें उस धर्म के शास्त्रों से जानकारी लेनी चाहिए।
वेदों में कहीं भी नवरात्रि पूजन का ज़िक्र नहीं है।
स्वयं दुर्गा जी देवी भागवत पुराण (स्कन्द 7, अध्याय 36, पृष्ठ 563) में हिमालय को ज्ञान उपदेश देते वक्त कहती हैं “उस एकमात्र परमात्मा को ही जाने, बाकी सब बातों को छोड़ दें। यही अमृतरूप परमात्मा तक पहुंचाने का पुल है।”

6. क्या दुर्गा जी हमारे सभी दुखों का निवारण कर सकती हैं?
हिन्दू धर्म के अनुसार 33 करोड़ देवी देवता होते हैं। सोचने वाली बात है कि जिस धर्म में 33 करोड़ देवी देवता हैं फिर भी आज के वक़्त कोई सुखी जीवन नहीं जी पा रहा। इसी कारण से सभी लोग भटक रहे हैं। आज इस देवता के पास, कल उस देवी के पास और फिर भी निराश। दुर्गा जी की पूजा करते करते भी कष्ट दूर नहीं होते क्योंकि उनसे लाभ पाने का सही मंत्र, सही साधना की विधि नहीं है किसी के पास। पूर्ण लाभ तो केवल पूर्ण परमात्मा “कबीर साहिब” जी की भक्ति से ही मिल सकता है।

7.दुर्गा जी ने स्वयं किसी और प्रभु की भक्ति करने (Navratri Puja Vidhi)के लिए कहा है
जैसा की दुर्गा जी खुद बता रही हैं श्रीमद्देवीभागवत के स्कन्ध सातवे (अध्याय36 पृष्ठ 563) में किसी और प्रभु की पूजा करने को। आखिर कौन है वो प्रभु (परमात्मा) भगवान् जिसके लिए देवी जी ने बोला है?
सभी शास्त्रो में प्रमाण है। कबीर साहेब ही परमात्मा हैं।

फजाईले जिक्र में आयत नं. 1, 2, 3, 6 तथा 7 में स्पष्ट प्रमाण है कि तुम कबीर अल्लाह कि बड़ाई बयान करो। वह कबीर अल्लाह तमाम पोसीदा और जाहिर चीजों को जानने वाला है और वह कबीर है और आलीशान रूत्बे वाला है।

पवित्र कुरान शरीफ सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 58 में
“अिबादिही खबीरा(कबीरा) कहा गया है।
कबीर अल्लाह ही इबादत के योग्य है।
सुरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59 में लिखा है कि कबीर परमात्मा ने छः दिन में सृष्टी की रचना की तथा सातवें दिन तख्त पर जा विराजा।

पवित्र अथर्ववेद काण्ड नं. 4 अनुवाक नं. 1 मंत्र 7
इस मंत्र में यह भी स्पष्ट कर दिया कि उस परमेश्वर का नाम कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर है, जिसने सर्व रचना की है। जो परमेश्वर अचल अर्थात् वास्तव में अविनाशी है।

पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। – ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18।

कबीर परमात्मा सम्पूर्ण शांति दायक है – यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32।

गुरुग्रन्थ साहेब पृष्ठ 721 पर अपनी अमृतवाणी महला 1 में श्री नानक जी ने कहा है कि –
“हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदीगार।
नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरां पाखाक”
जिसका भावार्थ है कि हे कबीर परमेश्वर जी मैं नानक कह रहा हूँ कि मेरा उद्धार हो गया, मैं तो आपके सेवकों के चरणों की धूर तुल्य हूँ।

पवित्र बाइबल में भगवान का नाम कबीर है – अय्यूब 36:5। और भी बहुत सारे प्रमाण हैं हमारे शास्त्रो में हैं।

एके साधे सब सधे, सब साधे सब जाय।
माली सींचे मूल कुँ, फले फुले अघाय।।

उदाहरण:- एक परमात्मा की पूजा करने से अन्य देवी देवता (नवरात्रि शुभ मुहूर्त) हमें मन इच्छित फल देते हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं शास्त्रों से प्रमाण देकर कि मोक्ष केवल शास्त्रनुकूल साधना करने से मिल सकता है। शास्त्रनुकूल साधना पूर्ण गुरु ही बता सकता है।

विडम्बना यह है की इस समय पता कैसे लगाया जाए की कौन गुरु पूरा है।
”सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्रा, कहै अठारा बोध।।“
सतगुरु गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि पूर्ण गुरु चारों वेद, छः शास्त्र, अठारह पुराण का पूर्ण जानकार होगा। अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा। वह भक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाता है।

यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25 – 26 में लिखा है कि पूर्ण गुरु वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताएगा वह जगत का उपकारक संत होता है।

अगर आप खुशियां और जन्म मरण से छुटकारा चाहते हैं, तो ये मनमाना आचरण छोड़कर शास्त्रानुकूल साधना करें जो हमारे शास्त्र बताते हैं। उस आधार पर भक्ति करने से हमें लाभ मिलता है और मोक्ष भी मिलता है। और वास्तविक परमात्मा कौन है ये भी जानकारी मिलेगी।

मनमाना आचरण करने से हम कभी सुखी नहीं हो सकते। यही हमारी सबसे बड़ी भूल है कि हम शास्त्रविरुद्ध साधना करते हैं। क्योंकि हमें हमारे धर्मगुरुओं ने सद्ग्रन्थों की सच्चाई नहीं बताई और हमने कभी कोशिश भी नहीं की जानने की।
अब हमारे पास मौका है हम सच्चाई को जान सकते हैं।
पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज जी ही एकमात्र संत हैं जो शास्त्रो का ज्ञान करवाते हैं। तो अब बिना किसी विलम्ब के सच्चाई को जानें, परखें और मनमाना आचरण छोडें।
प्रतिदिन शाम 7:30 से 8:30 तक साधना tv पर संत रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन देखें और सच्चाई से परिचित होकर शास्त्रनुकूल साधना करें।
धन्यवाद