52_Cruelities_On_GodKabir
Saturday, May 30, 2020
Friday, May 29, 2020
MagharLeela_Of_GodKabir
There is an Aami river in Maghar which was drained by the curse of Lord Shiva. Kabir Parmeshwar gestured with his hand and filled the river Ami and filled it with water.
This is the proof of the ability of the capable God.
GodKabir_Comes_In_4_Yugas
GodKabir_Comes_In_4_Yugas
God Kabir comes in all four ages. In satyug, lord kabir by the name of sat sukrit in treta ,god is known by tha name of muninder, karunamay is god is God's name in dwapar and in kalyug
Thursday, May 28, 2020
GodKabir_Comes_In_4_Yugas
In Kali Yuga, Kabir Parmeshwar as his real name Kabir appeared on the lotus flower in the Lahartara pond in Kashi city. In Kalyug, the childless couple Neeru and Neema nurtured them.
Wednesday, May 27, 2020
#GodKabir_CreatorOfUniverse
OJB 36: 5 (Ortho Orthodox Jewish Bible -OJB) God is Kabir (powerful), powerful and prudent. It is clear in the Bible that the name of the Lord is Kabir.
Must watch sadhna TV 7.30pm.
@satgururampalji
Tuesday, May 19, 2020
प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित
आपदा : कारण एव प्रभाव
13 हाल ही भारत, बांग्लादेश व नेपाल में आई भयंकर बाढ़ और कैरिबियन और अमेरिका में आए श्रेणी 5 के हरिकेन तथा अफ्रीका के 20 देशों में पड़े सूखे ने इन क्षेत्रों में भारी तबाही मचा दी थी, जिससे एक ओर तो सैकड़ों लोगों की मौत हुईं, वहीं दूसरी ओर लाखों लोगों का जीवन भी अस्त-व्यस्त हो चुका है। विदित हो कि प्रतिवर्ष 13 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण दिवस’ (International Day for Disaster Reduction) मनाया जाता है। इस दिन आपदा के प्रभाव को न्यूनतम करने हेतु विश्व समुदाय द्वारा किये गए उपायों का आकलन किया जाता है।
आपदा का अर्थ
आपदा अचानक होने वाली विध्वंसकारी घटना को कहा जाता है, जिससे व्यापक भौतिक क्षति व जान-माल का नुकसान होता है।
यह वह प्रतिकूल स्थिति है जो मानवीय, भौतिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक क्रियाकलापों को व्यापक तौर पर प्रभावित करती है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में- आपदा से तात्पर्य किसी क्षेत्र में हुए उस विध्वंस, अनिष्ट, विपत्ति या बेहद गंभीर घटना से है, जो प्राकृतिक या मानवजनित कारणों से या दुर्घटनावश अथवा लापरवाही से घटित होती है और जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में मानव जीवन की हानि होती है।
इसमें या तो मानव पीड़ित होता है अथवा संपत्ति को हानि पहुँचती है और पर्यावरण का भारी क्षरण होता है। यह घटना प्रायः प्रभावित क्षेत्र के समुदाय की सामना करने की क्षमता से अधिक भयावह होती है।
आपदाओं का कारण क्या है?
वर्तमान समय में समुद्रों के तापमान के बढ़ने से वायुमंडल में जलवाष्प की मात्र बढ़ रही है, जिससे कुछ स्थानों पर तो अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जबकि अन्य स्थानों पर सूखे का भयावह रूप देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे क्षेत्र भी होते हैं जहाँ बाढ़ तथा सूखे की स्थिति एक साथ उत्पन्न हो जाती है| अतः आपदा का प्रभाव बहुत विध्वंसकारी होता है।
विश्व में बढ़ते समुद्री स्तर को मापने के लिये टॉपेक्स/पोसीडॉन (TOPEX/Poseidon) नामक सबसे पहली सेटेलाइट को आज से 25 वर्ष पूर्व लॉन्च किया गया था और तब से लेकर अब तक किये गए समुद्री स्तरों के मापन से इस बात की पुष्टि हुई है कि प्रतिवर्ष समुद्र के वैश्विक स्तर में 3.4 मिलीमीटर की वृद्धि हो रही है। अतः इन 25 वर्षों के दौरान इसमें कुल 85 मिलीमीटर की वृद्धि हुई है। समुद्रों के तापमान में होने वाली वृद्धि और उनका गर्म होना विश्व स्तर पर उष्णकटिबंधीय तूफानों की तीव्रता में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
प्रभाव
सबसे कम विकसित देशों पर इन आपदाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है तथा ये वहाँ के जन-जीवन के लिये खतरा बन सकती हैं, जबकि विकसित और मध्यम आयवर्ग वाले देशों में बुनियादी ढांचे पर इनका अधिक प्रभाव पड़ता है।
वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष प्रदूषण से 4.3 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है, परन्तु इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। ऊष्मा को अवशोषित करने वाली हरित गृह गैसों का प्रभाव मौसमी घटनाओं पर पड़ता है| अतः इस ओर ही अधिक ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
पिछले दो वर्षों के दौरान उन देशों के 40 मिलियन से अधिक लोगों ने आपदाओं के कारण अपने घर छोड़ दिये, जो वैश्विक तापन में बहुत कम योगदान करते हैं।
भारत में आपदा को निम्न श्रेणियों में बाँटा गया है-
जल एवं जलवायु से जुड़ी आपदाएँ : चक्रवात, बवण्डर एवं तूफान, ओलावृष्टि, बादल फटना, लू व शीतलहर, हिमस्खलन, सूखा, समुद्र-क्षरण, मेघ-गर्जन व बिजली का कड़कना|
भूमि संबंधी आपदाएँ : भूस्खलन, भूकंप, बांध का टूटना, खदान में आग|
दुर्घटना संबंधी आपदाएँ: जंगलों में आग लगना, शहरों में आग लगना, खदानों में पानी भरना, तेल का फैलाव, प्रमुख इमारतों का ढहना, एक साथ कई बम विस्फोट, बिजली से आग लगना, हवाई, सड़क एवं रेल दुर्घटनाएँ|
जैविक आपदाएँ : महामारियॉ, कीटों का हमला, पशुओं की महामारियॉ, जहरीला भोजन|
रासायनिक, औद्योगिक एवं परमाणु संबंधी आपदाएं, रासायनिक गैस का रिसाव, परमाणु बम गिरना।
भारत की स्थिति
भू जलवायु परिस्थितियों के कारण भारत पारंपरिक रूप से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहा है। यहाँ बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप तथा भूस्खलन की घटनाएँ आम हैं।
भारत के लगभग 60% भू भाग में विभिन्न तीव्रता के भूकंपों का खतरा बना रहता है। 40 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बारंबार बाढ़ आती है। कुल 7,516 कि.मी. लंबी तटरेखा में से 5700 कि.मी. में चक्रवात का खतरा बना रहता है।
यहाँ की खेती योग्य क्षेत्र का लगभग 68% भाग सूखे के प्रति संवेदनशील है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में सुनामी का संकट बना रहता है।
देश के कई भागों में पतझड़ी व शुष्क पतझड़ी वनों में आग लगना आम बात है। हिमालयी क्षेत्र तथा पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में अक्सर भूस्खलन का खतरा रहता है।
आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम
आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम के तहत देश में प्राकृतिक आपदाओं के कुशल प्रबंधन हेतु अपेक्षित आँकड़ों व सूचनाओं को उपलब्ध कराने के लिये इसरो द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित आधारभूत संरचनाओं से प्राप्त सेवाओं का इष्टतम समायोजन किया जाता है।
भू-स्थिर उपग्रह (संचार व मौसम विज्ञान), निम्न पृथ्वी कक्षा के भू-प्रेक्षण उपग्रह, हवाई सर्वेक्षण प्रणाली और भू-आधारित मूल संरचनाएँ आपदा प्रबंधन प्रेक्षण प्रणाली के प्रमुख घटक हैं।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
आधुनिक युग का भीषणतम तूफान वर्ष 1201 में मिस्र एवं सीरिया में आया था, जिसमें 10 लाख लोग मारे गए थे। इसके पश्चात् सन् 1556 में चीन में आए भूकंप में 8.50 लाख व्यक्तियों की मौत हुई थी।
भारत का ज्ञात भीषणतम भूकंप सन् 1737 में कलकत्ता में आया था, जिसमें 3 लाख लोग हताहत हुए थे।
रूस, चीन, सीरिया, मिस्र, ईरान, जापान, जावा, इटली, मोरक्को, तुर्की, मैक्सिको, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, यूनान, इण्डोनेशिया तथा कोलम्बिया इत्यादि भूकंप के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं।
हिमालय क्षेत्र आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इस क्षेत्र की भीतरी चट्टानें निरंतर उत्तर की ओर खिसक रही हैं। विश्वभर में 10 ऐसे खतरनाक ज्वालामुखी हैं जो एक बड़े क्षेत्र को तबाह कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय-आपदा शमन रणनीति (यूएनआईएसडीआर) के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के मामले में चीन के बाद दूसरा स्थान भारत का है।
भारत में आपदाओं की रूपरेखा मुख्यतः भू-जलवायु स्थितियों और स्थालाकृतियों की विशेषताओं से निर्धारित होती है और उनमें जो अंतनिर्हित कमज़ोरियाँ होती हैं उन्हीं के फलस्वरूप विभिन्न तीव्रता की आपदाएँ वार्षिक रूप से घटित होती रहती हैं। आवृति, प्रभाव और अनिश्चितताओं के लिहाज़ से जलवायु-प्रेरित आपदाओं का स्थान सबसे ऊपर है।
भारत के भू-भाग का लगभग 59 प्रतिशत भूकंप की संभावना वाला क्षेत्र है। हिमालय और उसके आसपास के क्षेत्र, पूर्वोत्तर, गुजरात के कुछ क्षेत्र और अंडमान निकोबार द्वीप समूह भूकंपीय दृष्टि से सबसे सक्रिय क्षेत्र हैं।
निष्कर्ष
यह स्पष्ट है आपदा एक ऐसी घटना है जिसका प्रभाव बड़े क्षेत्र में पड़ता है और इसकी पूरी तरीके से रोकथाम करना कोई आसान कार्य नहीं है। परन्तु इसका प्रबंधन अवश्य ही किया जा सकता है। चूँकि विश्व में सभी देश किसी न किसी प्रकार की आपदा से प्रभावित हैं,अतः यह आवश्यक है कि विश्व के सभी देश इस दिशा में मिलकर प्रयास करें। आपदा की रोकथाम करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन और पृथ्वी की प्राकृतिक अवशोषण क्षमता के मध्य पारिस्थितिक संतुलन स्थापित करके भी निश्चित रूप से इस दिशा में अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।
50 वर्षों में, "बाबा वंगा" ने लगभग 100 भविष्यवाणियां की थीं। उनमें से सभी सत्य हो गए हैं। उनकी भविष्यवाणियां जलवायु और प्राकृतिक आपदा से संबंधित थीं; लेकिन बार-बार उन्होंने एक महान संत के बारे में भविष्यवाणी भी की थी संत रामपाल जी के बारे में भविष्यवाणी
13 हाल ही भारत, बांग्लादेश व नेपाल में आई भयंकर बाढ़ और कैरिबियन और अमेरिका में आए श्रेणी 5 के हरिकेन तथा अफ्रीका के 20 देशों में पड़े सूखे ने इन क्षेत्रों में भारी तबाही मचा दी थी, जिससे एक ओर तो सैकड़ों लोगों की मौत हुईं, वहीं दूसरी ओर लाखों लोगों का जीवन भी अस्त-व्यस्त हो चुका है। विदित हो कि प्रतिवर्ष 13 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण दिवस’ (International Day for Disaster Reduction) मनाया जाता है। इस दिन आपदा के प्रभाव को न्यूनतम करने हेतु विश्व समुदाय द्वारा किये गए उपायों का आकलन किया जाता है।
आपदा का अर्थ
आपदा अचानक होने वाली विध्वंसकारी घटना को कहा जाता है, जिससे व्यापक भौतिक क्षति व जान-माल का नुकसान होता है।
यह वह प्रतिकूल स्थिति है जो मानवीय, भौतिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक क्रियाकलापों को व्यापक तौर पर प्रभावित करती है।
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में- आपदा से तात्पर्य किसी क्षेत्र में हुए उस विध्वंस, अनिष्ट, विपत्ति या बेहद गंभीर घटना से है, जो प्राकृतिक या मानवजनित कारणों से या दुर्घटनावश अथवा लापरवाही से घटित होती है और जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में मानव जीवन की हानि होती है।
इसमें या तो मानव पीड़ित होता है अथवा संपत्ति को हानि पहुँचती है और पर्यावरण का भारी क्षरण होता है। यह घटना प्रायः प्रभावित क्षेत्र के समुदाय की सामना करने की क्षमता से अधिक भयावह होती है।
आपदाओं का कारण क्या है?
वर्तमान समय में समुद्रों के तापमान के बढ़ने से वायुमंडल में जलवाष्प की मात्र बढ़ रही है, जिससे कुछ स्थानों पर तो अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जबकि अन्य स्थानों पर सूखे का भयावह रूप देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे क्षेत्र भी होते हैं जहाँ बाढ़ तथा सूखे की स्थिति एक साथ उत्पन्न हो जाती है| अतः आपदा का प्रभाव बहुत विध्वंसकारी होता है।
विश्व में बढ़ते समुद्री स्तर को मापने के लिये टॉपेक्स/पोसीडॉन (TOPEX/Poseidon) नामक सबसे पहली सेटेलाइट को आज से 25 वर्ष पूर्व लॉन्च किया गया था और तब से लेकर अब तक किये गए समुद्री स्तरों के मापन से इस बात की पुष्टि हुई है कि प्रतिवर्ष समुद्र के वैश्विक स्तर में 3.4 मिलीमीटर की वृद्धि हो रही है। अतः इन 25 वर्षों के दौरान इसमें कुल 85 मिलीमीटर की वृद्धि हुई है। समुद्रों के तापमान में होने वाली वृद्धि और उनका गर्म होना विश्व स्तर पर उष्णकटिबंधीय तूफानों की तीव्रता में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
प्रभाव
सबसे कम विकसित देशों पर इन आपदाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है तथा ये वहाँ के जन-जीवन के लिये खतरा बन सकती हैं, जबकि विकसित और मध्यम आयवर्ग वाले देशों में बुनियादी ढांचे पर इनका अधिक प्रभाव पड़ता है।
वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष प्रदूषण से 4.3 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है, परन्तु इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। ऊष्मा को अवशोषित करने वाली हरित गृह गैसों का प्रभाव मौसमी घटनाओं पर पड़ता है| अतः इस ओर ही अधिक ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
पिछले दो वर्षों के दौरान उन देशों के 40 मिलियन से अधिक लोगों ने आपदाओं के कारण अपने घर छोड़ दिये, जो वैश्विक तापन में बहुत कम योगदान करते हैं।
भारत में आपदा को निम्न श्रेणियों में बाँटा गया है-
जल एवं जलवायु से जुड़ी आपदाएँ : चक्रवात, बवण्डर एवं तूफान, ओलावृष्टि, बादल फटना, लू व शीतलहर, हिमस्खलन, सूखा, समुद्र-क्षरण, मेघ-गर्जन व बिजली का कड़कना|
भूमि संबंधी आपदाएँ : भूस्खलन, भूकंप, बांध का टूटना, खदान में आग|
दुर्घटना संबंधी आपदाएँ: जंगलों में आग लगना, शहरों में आग लगना, खदानों में पानी भरना, तेल का फैलाव, प्रमुख इमारतों का ढहना, एक साथ कई बम विस्फोट, बिजली से आग लगना, हवाई, सड़क एवं रेल दुर्घटनाएँ|
जैविक आपदाएँ : महामारियॉ, कीटों का हमला, पशुओं की महामारियॉ, जहरीला भोजन|
रासायनिक, औद्योगिक एवं परमाणु संबंधी आपदाएं, रासायनिक गैस का रिसाव, परमाणु बम गिरना।
भारत की स्थिति
भू जलवायु परिस्थितियों के कारण भारत पारंपरिक रूप से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहा है। यहाँ बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप तथा भूस्खलन की घटनाएँ आम हैं।
भारत के लगभग 60% भू भाग में विभिन्न तीव्रता के भूकंपों का खतरा बना रहता है। 40 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बारंबार बाढ़ आती है। कुल 7,516 कि.मी. लंबी तटरेखा में से 5700 कि.मी. में चक्रवात का खतरा बना रहता है।
यहाँ की खेती योग्य क्षेत्र का लगभग 68% भाग सूखे के प्रति संवेदनशील है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में सुनामी का संकट बना रहता है।
देश के कई भागों में पतझड़ी व शुष्क पतझड़ी वनों में आग लगना आम बात है। हिमालयी क्षेत्र तथा पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में अक्सर भूस्खलन का खतरा रहता है।
आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम
आपदा प्रबंधन सहायता कार्यक्रम के तहत देश में प्राकृतिक आपदाओं के कुशल प्रबंधन हेतु अपेक्षित आँकड़ों व सूचनाओं को उपलब्ध कराने के लिये इसरो द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित आधारभूत संरचनाओं से प्राप्त सेवाओं का इष्टतम समायोजन किया जाता है।
भू-स्थिर उपग्रह (संचार व मौसम विज्ञान), निम्न पृथ्वी कक्षा के भू-प्रेक्षण उपग्रह, हवाई सर्वेक्षण प्रणाली और भू-आधारित मूल संरचनाएँ आपदा प्रबंधन प्रेक्षण प्रणाली के प्रमुख घटक हैं।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
आधुनिक युग का भीषणतम तूफान वर्ष 1201 में मिस्र एवं सीरिया में आया था, जिसमें 10 लाख लोग मारे गए थे। इसके पश्चात् सन् 1556 में चीन में आए भूकंप में 8.50 लाख व्यक्तियों की मौत हुई थी।
भारत का ज्ञात भीषणतम भूकंप सन् 1737 में कलकत्ता में आया था, जिसमें 3 लाख लोग हताहत हुए थे।
रूस, चीन, सीरिया, मिस्र, ईरान, जापान, जावा, इटली, मोरक्को, तुर्की, मैक्सिको, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, यूनान, इण्डोनेशिया तथा कोलम्बिया इत्यादि भूकंप के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं।
हिमालय क्षेत्र आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इस क्षेत्र की भीतरी चट्टानें निरंतर उत्तर की ओर खिसक रही हैं। विश्वभर में 10 ऐसे खतरनाक ज्वालामुखी हैं जो एक बड़े क्षेत्र को तबाह कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय-आपदा शमन रणनीति (यूएनआईएसडीआर) के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के मामले में चीन के बाद दूसरा स्थान भारत का है।
भारत में आपदाओं की रूपरेखा मुख्यतः भू-जलवायु स्थितियों और स्थालाकृतियों की विशेषताओं से निर्धारित होती है और उनमें जो अंतनिर्हित कमज़ोरियाँ होती हैं उन्हीं के फलस्वरूप विभिन्न तीव्रता की आपदाएँ वार्षिक रूप से घटित होती रहती हैं। आवृति, प्रभाव और अनिश्चितताओं के लिहाज़ से जलवायु-प्रेरित आपदाओं का स्थान सबसे ऊपर है।
भारत के भू-भाग का लगभग 59 प्रतिशत भूकंप की संभावना वाला क्षेत्र है। हिमालय और उसके आसपास के क्षेत्र, पूर्वोत्तर, गुजरात के कुछ क्षेत्र और अंडमान निकोबार द्वीप समूह भूकंपीय दृष्टि से सबसे सक्रिय क्षेत्र हैं।
निष्कर्ष
यह स्पष्ट है आपदा एक ऐसी घटना है जिसका प्रभाव बड़े क्षेत्र में पड़ता है और इसकी पूरी तरीके से रोकथाम करना कोई आसान कार्य नहीं है। परन्तु इसका प्रबंधन अवश्य ही किया जा सकता है। चूँकि विश्व में सभी देश किसी न किसी प्रकार की आपदा से प्रभावित हैं,अतः यह आवश्यक है कि विश्व के सभी देश इस दिशा में मिलकर प्रयास करें। आपदा की रोकथाम करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन और पृथ्वी की प्राकृतिक अवशोषण क्षमता के मध्य पारिस्थितिक संतुलन स्थापित करके भी निश्चित रूप से इस दिशा में अच्छे परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।
50 वर्षों में, "बाबा वंगा" ने लगभग 100 भविष्यवाणियां की थीं। उनमें से सभी सत्य हो गए हैं। उनकी भविष्यवाणियां जलवायु और प्राकृतिक आपदा से संबंधित थीं; लेकिन बार-बार उन्होंने एक महान संत के बारे में भविष्यवाणी भी की थी संत रामपाल जी के बारे में भविष्यवाणी
Wednesday, May 13, 2020
पर्यावरण प्रदूषण के बारे में
पर्यावरण प्रदूषण की वर्तमान स्थिति
🌲🌳🌳🌳🌳🌳🌳
ओडम के अनुसार ,"वातावरणीय व जलवायु, मिट्टी आदि के भौतिक ,रासायनिक व जैविक गुणों में अवांछनीय और हानिकारक परिवर्तन ही प्रदूषण है"
💐पर्यावरण प्रदूषण को निम्न 6 प्रकारो में विभाजित किया गया है-
1. वायु प्रदूषण
2. जल प्रदूषण
3. मृदा प्रदूषण
4. ध्वनि प्रदूषण
5. रेडियोधर्मी प्रदूषण
6. इलेक्ट्रॉनिक प्रदूषण
आज भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती आबादी वाला देश है जबकि पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संरक्षण में सबसे पीछे आज हमारा देश कहीं पर्यावरणीय समस्याओं से ग्रस्त है जो पिछले केवल कुछ दशकों से काफी बड़ी हुई है यह सही समय है जब हम इन मुद्दों पर प्रकाश डालें और पर्यावरण की समस्याओं का समाधान करें।
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
🌴 बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण🌴
🌱यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्यधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही है उन्हें ही पाप करते हैं आज पाप इतना बढ़ गया है कि इस विकृति के कारण स्वयं मानव ने अपने शरीर को दूषित कर दिया है 🌱
घर के वातावरण में मनुष्य के विचारों के कारण निर्माण हुए परिपाक से सर्वत्र ही हवा तथा पानी दूषित हो गया है इसलिए आज प्रमुखता से प्रदूषण की समस्या सभी को डरा रही है
यह सब हमारी विकृति के कारण ही हुआ है मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा ,शुद्ध पानी ,सात्विक आहार ,स्थल तथा वातावरण के अनुसार वेशभूषा और घर की आवश्यकता है परंतु इसे यह ध्यान में नहीं आता ।कि स्वयं के सुख की विकृत समस्या के कारण ही हम अपना नाश कर रहे हैं इसलिए अपना रहन-सहन निसर्ग नियम के अनुसार करना चाहिए हमने अपने ही अज्ञान के कारण अपने लिए समस्या का निर्माण कर लिया है🌱🌱🌱🌱
मनुष्य अपने अंदर के सभी विकार त्यागे और पशु -पक्षी ,पेड़ -पौधों, सभी प्राणियों के लिए दया की भावना रखें तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है
🌳🌷पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए किए गए उपाय🌷🌳
🌿भारत सरकार ने 1992 में प्रदूषण की रोकथाम एवं पर्यावरण के क्षरण को रोकने के लिए "प्रदूषण में कमी पर नीति वक्तव्य" बनाया गया था
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी )पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का हिस्सा है बोर्ड के प्रमुख कार्यों में राज्यों को साफ-सफाई एवं प्रदूषण नियंत्रण के बारे में सहायता देना तथा जागरूक बनाना ,जल प्रदूषण को रोकने के लिए कारगर उपाय करना ,वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने एवं देश में प्रदूषण का स्तर घटाना है
प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा भी अनेक प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जैसे स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना आदी
🌲🌳🌳🌳🌳🌳🌳
ओडम के अनुसार ,"वातावरणीय व जलवायु, मिट्टी आदि के भौतिक ,रासायनिक व जैविक गुणों में अवांछनीय और हानिकारक परिवर्तन ही प्रदूषण है"
💐पर्यावरण प्रदूषण को निम्न 6 प्रकारो में विभाजित किया गया है-
1. वायु प्रदूषण
2. जल प्रदूषण
3. मृदा प्रदूषण
4. ध्वनि प्रदूषण
5. रेडियोधर्मी प्रदूषण
6. इलेक्ट्रॉनिक प्रदूषण
आज भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती आबादी वाला देश है जबकि पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संरक्षण में सबसे पीछे आज हमारा देश कहीं पर्यावरणीय समस्याओं से ग्रस्त है जो पिछले केवल कुछ दशकों से काफी बड़ी हुई है यह सही समय है जब हम इन मुद्दों पर प्रकाश डालें और पर्यावरण की समस्याओं का समाधान करें।
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
🌴 बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण🌴
🌱यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्यधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही है उन्हें ही पाप करते हैं आज पाप इतना बढ़ गया है कि इस विकृति के कारण स्वयं मानव ने अपने शरीर को दूषित कर दिया है 🌱
घर के वातावरण में मनुष्य के विचारों के कारण निर्माण हुए परिपाक से सर्वत्र ही हवा तथा पानी दूषित हो गया है इसलिए आज प्रमुखता से प्रदूषण की समस्या सभी को डरा रही है
यह सब हमारी विकृति के कारण ही हुआ है मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा ,शुद्ध पानी ,सात्विक आहार ,स्थल तथा वातावरण के अनुसार वेशभूषा और घर की आवश्यकता है परंतु इसे यह ध्यान में नहीं आता ।कि स्वयं के सुख की विकृत समस्या के कारण ही हम अपना नाश कर रहे हैं इसलिए अपना रहन-सहन निसर्ग नियम के अनुसार करना चाहिए हमने अपने ही अज्ञान के कारण अपने लिए समस्या का निर्माण कर लिया है🌱🌱🌱🌱
मनुष्य अपने अंदर के सभी विकार त्यागे और पशु -पक्षी ,पेड़ -पौधों, सभी प्राणियों के लिए दया की भावना रखें तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है
🌳🌷पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए किए गए उपाय🌷🌳
🌿भारत सरकार ने 1992 में प्रदूषण की रोकथाम एवं पर्यावरण के क्षरण को रोकने के लिए "प्रदूषण में कमी पर नीति वक्तव्य" बनाया गया था
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी )पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का हिस्सा है बोर्ड के प्रमुख कार्यों में राज्यों को साफ-सफाई एवं प्रदूषण नियंत्रण के बारे में सहायता देना तथा जागरूक बनाना ,जल प्रदूषण को रोकने के लिए कारगर उपाय करना ,वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने एवं देश में प्रदूषण का स्तर घटाना है
प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा भी अनेक प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जैसे स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना आदी
Tuesday, May 12, 2020
अंधश्रद्धा -भक्ति- खतरा -ए -जान
वर्तमान स्थिति=
आज का मानव केवल मनोरंजन और खेल कूद में ही व्यस्त रहता है और नास्तिकता की ओर बढ़ता जा रहा है जो कि गलत है मानव जन्म का उद्देश्य भूल गया है
नास्तिकता का कारण=
नकली धर्मगुरुओ ने आज समाज को हमारे प्रमुख धर्म ग्रंथों से कोसों दूर कर दिया और गलत भक्ति साधना कर और करवा रहे हैं जिससे साधक को कोई लाभ न होने से नास्तिकता की ओर बढ़ रहे हैं
आखिर उपाय=
शास्त्र अनुकूल भक्ति अपनाएं और आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही सभी धर्म ग्रंथों को खोल खोलकर दिखा रहे हैं सत्य को स्वीकार करें देखें साधना टीवी 7:30 से 8:30 शाम
आज का मानव केवल मनोरंजन और खेल कूद में ही व्यस्त रहता है और नास्तिकता की ओर बढ़ता जा रहा है जो कि गलत है मानव जन्म का उद्देश्य भूल गया है
नास्तिकता का कारण=
नकली धर्मगुरुओ ने आज समाज को हमारे प्रमुख धर्म ग्रंथों से कोसों दूर कर दिया और गलत भक्ति साधना कर और करवा रहे हैं जिससे साधक को कोई लाभ न होने से नास्तिकता की ओर बढ़ रहे हैं
आखिर उपाय=
शास्त्र अनुकूल भक्ति अपनाएं और आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही सभी धर्म ग्रंथों को खोल खोलकर दिखा रहे हैं सत्य को स्वीकार करें देखें साधना टीवी 7:30 से 8:30 शाम
Friday, May 8, 2020
सद्भक्ति से लाभ
भक्ति करने से आर्थिक मानसिक और शारीरिक लाभ होते है इसलिए सत भक्ति अपनाएं और अपना जीवन सफल बनाएं और जानने के लिए पढ़ें पुस्तक जीने की राह ओर देखें साधना टीवी रोज शाम 7.30 से 8.30 तक
शिक्षा का सही लाभ तो वह लोग उठा रहे हैं जो सत्य ज्ञान को पहचान कर सद्भक्ति अपना रहे हैं। और वो भक्ति संत रामपाल जी महाराज जी दे रहे हैं वो भी सभी धर्म के धर्म ग्रन्थ से प्रमाण सहित
😊😊😊🌷🌷
शिक्षा का सही लाभ तो वह लोग उठा रहे हैं जो सत्य ज्ञान को पहचान कर सद्भक्ति अपना रहे हैं। और वो भक्ति संत रामपाल जी महाराज जी दे रहे हैं वो भी सभी धर्म के धर्म ग्रन्थ से प्रमाण सहित
😊😊😊🌷🌷
Location -
Tonk, Rajasthan ,India
Thursday, May 7, 2020
सद्भक्ति से लाभ
कौन है सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा ही सभी पापों को क्षमा कर सकते हैं।
जब तक हम पूर्ण संत से नाम उपदेश लेकर सद्भक्ति नहीं करेंगे मर्यादा में रहकर तो हमें कोई लाभ नहीं होगा।
सद्भक्ति अपनाएं दुखों को दूर भगाएं।
सद्भक्ति एकमात्र उपाय है जिससे मनुष्य में दैवीय गुणों का प्रसार शुरू होता है और राक्षस प्रवृत्ति की समाप्ति होती है।
Wednesday, May 6, 2020
शराब से नाश
यदि आप शराब की लत नहीं छोड़ पा रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र से भी आपको इस बारे में सफलता नहीं मिली है।
तो निराश न हों संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं
परमात्मा शराब हमारी विभिन्न अंगों को खराब करती है जैसे हॉट लीवर किडनी आदि अंगों को खराब करती है इससे बचे और संत रामपाल जी महाराज की लिखी पुस्तक ज्ञान गंगा को पढ़े
तो निराश न हों संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं
परमात्मा शराब हमारी विभिन्न अंगों को खराब करती है जैसे हॉट लीवर किडनी आदि अंगों को खराब करती है इससे बचे और संत रामपाल जी महाराज की लिखी पुस्तक ज्ञान गंगा को पढ़े
Location -
Tonk, Rajasthan, India
नशा खराब है
परमात्मा कबीर साहिब जी अपनी अमर वाणी में कहते हैं-
मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी।
सत्तर जन्म कुत्ते के जानी॥
शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी।ये खुद परमात्मा का संविधान कहता है।आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को!!
संतरामपालजी_का_सत्संग_सुनें 👈🙏
नशा करने से नाश होता है। इसलिए पूर्ण संत के सत्संग सुनें जिससे ग्रह क्लेश भी समाप्त हो जाता है।
प्रमाण सहित आध्यात्मिक ज्ञान के लिए देखिए रोजाना
श्रद्धा टीवी दोपहर 2:00 बजे से
साधना टीवी रात्रि 7:30 बजे से
ईश्वर टीवी रात्रि 8:30 बजे से
मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी।
सत्तर जन्म कुत्ते के जानी॥
शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी।ये खुद परमात्मा का संविधान कहता है।आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को!!
संतरामपालजी_का_सत्संग_सुनें 👈🙏
नशा करने से नाश होता है। इसलिए पूर्ण संत के सत्संग सुनें जिससे ग्रह क्लेश भी समाप्त हो जाता है।
प्रमाण सहित आध्यात्मिक ज्ञान के लिए देखिए रोजाना
श्रद्धा टीवी दोपहर 2:00 बजे से
साधना टीवी रात्रि 7:30 बजे से
ईश्वर टीवी रात्रि 8:30 बजे से
शराब है खराब
नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है।शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े,लीवर, हृदय।शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है।इन सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग अवश्य सुनें।
देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है।
और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता और आप इस अनमोल जीवन को शराब पीने में बर्बाद कर रहे हो।
देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है।
और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता और आप इस अनमोल जीवन को शराब पीने में बर्बाद कर रहे हो।
शराब है खराब
नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है।शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े,लीवर, हृदय।शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है।इन सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग अवश्य सुनें।
देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है।
और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता और आप इस अनमोल जीवन को शराब पीने में बर्बाद कर रहे हो।
Tuesday, May 5, 2020
True knowledge
कोरोना वायरस का इलाज
कोरोना वायरस का यही एकमात्र उपाय है आज दुनिया में
शास्त्र अनुकूल भक्ति
सद्भक्ति से लाभ ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 5 सूक्त 162 मंत्र 5 सुक्त 163 मंत्र 13 में स्पष्ट है कि यदि रोगी की जीवन शक्ति नष्ट हो गई हो और रोगी मृत्यु के समीप पहुंच गया हो तो भी परमात्मा उसको सही करके 100 वर्ष की आयु प्रदान करता है
अंत में मेरे मन की बात।
भारत सरकार और मेरे प्यारे देशवासियों मैं आपसे एक गुजारिश करना चाहती हूं। कि एक बार आप अपने दिमाग से सोचे कि क्या हम यह सही कर रहे हैं या गलत कर रहे हैं या हम ऐसा क्यों कर रहे हैं और हमें क्या करना चाहिए? जहां हमें घरों में रह कर। सत भक्ति करनी चाहिए। वहां पर हम क्या कर रहे हैं? और क्या नहीं यह सब आप जानते हैं नीचे के लिंक दे रही हूं। उसे एक बार क्लिक कर कर जरूर आप उस तक पहुंच जाएं। और कमेंट कर कर बताएं कि आपको मेरा ब्लॉक कैसा लगा
फ्री पुस्तक download करने के लिए हमारी website पर जाएं
हमारी website www.jagatgururampalji.org
Alcohol corona covid covid19
covid19india covid19rjmahi godkabir
Location Dooni, Rajasthan, India
कोरोनावायरस का एकमात्र उपाय
जानिए कैसे खत्म होगा यह कोरोना वायरस
कोरोना वायरस सिर्फ शास्त्र अनुकूल भक्ति करने से ही समाप्त होगा
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सद्भक्ति से लाभ आज वही लाभ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज दे रहे हैं उनके सत्संग सुनाएं और नाम दान लो अपने जीवन का कल्याण कराएं जानकारी के लिए साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे ईश्वर टीवी पर शाम 8:30 बजे रोजाना देखिए
इस प्रकार से खत्म होगा कोरोनावायरस
सद्भक्ति से लाभ सत भक्ति से कैंसर जैसी भयानक बीमारी भी बिना इलाज तुरंत सही हो जाती है।
फ्री पुस्तक डाउनलोड करने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं
हमारी वेबसाइट है http://www.jagatgururampalji.org/
Alcohol birth Coronvirus
Covid-19 God lockdown
Location :Dooni, Rajasthan, India
कोरोना वायरस सिर्फ शास्त्र अनुकूल भक्ति करने से ही समाप्त होगा
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सद्भक्ति से लाभ आज वही लाभ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज दे रहे हैं उनके सत्संग सुनाएं और नाम दान लो अपने जीवन का कल्याण कराएं जानकारी के लिए साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे ईश्वर टीवी पर शाम 8:30 बजे रोजाना देखिए
इस प्रकार से खत्म होगा कोरोनावायरस
सद्भक्ति से लाभ सत भक्ति से कैंसर जैसी भयानक बीमारी भी बिना इलाज तुरंत सही हो जाती है।
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हमारी वेबसाइट है http://www.jagatgururampalji.org/
Alcohol birth Coronvirus
Covid-19 God lockdown
Location :Dooni, Rajasthan, India
कोरोना वायरस से बचाव
कोरोना के इलाज मात्र 1 तरीके से हो सकता है वह शास्त्र अनुकूल साधना करने से ही हो सकता है
शास्त्र अनुकूल भक्ति उस पूर्ण परमात्मा की भक्ति हैhttps://youtu.be/9aSzKI4TMAE
सत भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सद्भक्ति से संपूर्ण लाभ मिलते हैं सभी के जीवन में बहुत से बदलाव हो जाते हैं यह पूर्ण संत की दी हुईभक्ति है संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं रोज देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे
शास्त्र अनुकूल भक्ति उस पूर्ण परमात्मा की भक्ति हैhttps://youtu.be/9aSzKI4TMAE
सत भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सद्भक्ति से संपूर्ण लाभ मिलते हैं सभी के जीवन में बहुत से बदलाव हो जाते हैं यह पूर्ण संत की दी हुईभक्ति है संत रामपाल जी महाराज ही वह तत्वदर्शी संत हैं रोज देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे
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भक्ति करने से आर्थिक मानसिक और शारीरिक लाभ होते है इसलिए सत भक्ति अपनाएं और अपना जीवन सफल बनाएं और जानने के लिए पढ़ें पुस्तक जीने की राह ओ...





















